सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

वजन बढ़ाने के लिए 1 घंटे का योग चार्ट - Yoga Chart for thin, under weight and weak person

 


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🕉️ वजन बढ़ाने के लिए 1 घंटे का योग चार्ट
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यह योग कार्यक्रम विशेष रूप से दुबले, कमजोर और कम वजन वाले व्यक्तियों के लिए बनाया गया है, जो प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ वजन बढ़ाना, पाचन सुधारना, मांसपेशियों को मजबूत करना और शरीर में ताकत बढ़ाना चाहते हैं।

⚠️ अभ्यास खाली पेट करें या भोजन के 3–4 घंटे बाद करें।
⚠️ श्वास धीमी और स्थिर रखें।
⚠️ पौष्टिक आहार और पर्याप्त विश्राम अवश्य लें।

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0 – 5 मिनट 🌿 मन को केंद्रित करना व गहरी श्वास
• सुखासन में बैठें
• गहरी डायाफ्राम श्वास लें
• 5 बार धीमा “ॐ” जप
• सकारात्मक संकल्प: “मेरा शरीर मजबूत और स्वस्थ बन रहा है।”

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5 – 10 मिनट 🔥 हल्का वार्म-अप
• गर्दन घुमाना
• कंधे घुमाना
• हाथों को आगे-पीछे झुलाना
• कमर घुमाना
• स्थान पर हल्की चाल

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10 – 25 मिनट 💪 शक्ति बढ़ाने वाले खड़े आसन
• ताड़ासन – 2 मिनट
• उत्कटासन (चेयर पोज) – 3 मिनट
• वीरभद्रासन I – प्रत्येक ओर 3 मिनट
• वीरभद्रासन II – प्रत्येक ओर 3 मिनट
• त्रिकोणासन – 3 मिनट

(ये आसन मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, भूख बढ़ाते हैं और मेटाबोलिज्म संतुलित करते हैं।)

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25 – 40 मिनट 🧘 पाचन व मांसपेशी सुदृढ़ करने वाले आसन
• भुजंगासन – 3 मिनट
• शलभासन – 3 मिनट
• धनुरासन – 3 मिनट
• सेतुबंधासन – 3 मिनट
• पवनमुक्तासन – 3 मिनट

(ये आसन पाचन शक्ति और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक हैं।)

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40 – 50 मिनट 🌬️ भूख व ऊर्जा बढ़ाने के लिए प्राणायाम
• भस्त्रिका – 3 राउंड
• कपालभाति – 3 राउंड × 30 श्वास
• अनुलोम-विलोम – 5 मिनट

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50 – 60 मिनट 🛌 विश्राम व सकारात्मक चिंतन
• शवासन
• स्वयं को स्वस्थ व मजबूत रूप में कल्पना करें
• धीमी गहरी श्वास

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🍲 वजन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सुझाव
• हर 3–4 घंटे में कुछ पौष्टिक खाएँ
• दूध, घी, मेवे, केला, खजूर शामिल करें
• 7–8 घंटे की नींद लें
• तनाव से दूर रहें




Extremely weak recovery yoga chart - (अत्यंत कमजोर, बीमारी से रिकवरी कर रहे व्यक्ति हेतु)



यह अत्यंत कमजोर (Extremely Weak) / बीमारी से रिकवरी कर रहे साधकों के लिए 1 घंटे का अत्यंत सौम्य, सुरक्षित और ऊर्जा-वर्धक योग चार्ट है। इसमें कोई जोर, झटका या कठिन आसन नहीं है।

⚠️ यदि हाल ही में सर्जरी, हार्ट समस्या, तेज बुखार या गंभीर कमजोरी हो तो पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
⚠️ खाली पेट या हल्का फल लेने के 2 घंटे बाद अभ्यास करें।

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🕉️ 1 घंटा – अत्यंत कमजोर रिकवरी योग चार्ट
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0 – 5 मिनट 🌿 शांति व संकल्प
• बिस्तर या मैट पर आराम से बैठें/लेटें
• आँखें बंद
• गहरी धीमी श्वास
• मन में संकल्प – “मैं प्रतिदिन स्वस्थ हो रहा/रही हूँ।”

5 – 15 मिनट 🌬️ श्वास अभ्यास (ऊर्जा जागरण)
• दीर्घ श्वसन – 5 मिनट
• हाथ ऊपर ले जाकर श्वास अंदर, नीचे लाकर श्वास बाहर – 5 मिनट
• पेट से श्वास (डायाफ्राम श्वसन) – 5 मिनट

15 – 25 मिनट 🛏️ लेटकर हल्की मूवमेंट
• पैर की उंगलियाँ मोड़ना-सीधा करना
• टखना घुमाना
• हाथों की मुट्ठी खोलना-बंद करना
• घुटना हल्का मोड़-सीधा (यदि संभव हो)
(प्रत्येक 1–2 मिनट, बिना थकान)

25 – 35 मिनट 🧘 सरल आसन (बहुत सौम्य)
• सुप्त ताड़ासन (लेटकर शरीर खिंचाव)
• पवनमुक्तासन (एक-एक पैर, बिना जोर)
• मकरासन (पेट के बल हल्का विश्राम, यदि संभव हो)

35 – 45 मिनट 🌸 बैठकर हल्की क्रियाएँ
• गर्दन दायें-बायें धीरे
• कंधे ऊपर-नीचे
• हथेली रगड़कर आँखों पर रखना (पामिंग)
• 3–5 बार लंबा “ॐ”

45 – 55 मिनट 🌬️ प्राणायाम (बहुत हल्का)
• अनुलोम-विलोम – 5 मिनट (धीमी गति)
• भ्रामरी – 5 बार

55 – 60 मिनट 🛌 शवासन
• पूरा शरीर ढीला
• श्वास पर ध्यान
• शरीर में ऊर्जा का अनुभव

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🌿 लाभ
• धीरे-धीरे ताकत बढ़ेगी
• फेफड़े मजबूत होंगे
• रक्तसंचार सुधरेगा
• मानसिक शांति व आत्मविश्वास बढ़ेगा

🍲 रिकवरी के साथ ध्यान रखें
• मूंग दाल, खिचड़ी, दूध, घी की थोड़ी मात्रा
• भीगे बादाम, खजूर (यदि डॉक्टर अनुमति दें)
• पर्याप्त नींद
• अधिक थकान से बचें




रविवार, 22 फ़रवरी 2026

Yoga Chart for 65+ Citizen


     

65+ वर्ष के लिए योग अभ्यास सुरक्षित, धीमा और संतुलित होना चाहिए। इसमें जोड़ो की लचक, हल्का बल, श्वास संतुलन और मन की शांति पर ध्यान रहे।

⚠️ उच्च रक्तचाप, घुटना दर्द, हार्ट समस्या या चक्कर की शिकायत हो तो पहले डॉक्टर की सलाह लें।

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🕉️ 1 घंटे का योग टाइम-टेबल (65+ आयु)
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0 – 5 मिनट 🌸 प्रारंभिक प्रार्थना व श्वसन
• सुखासन या कुर्सी पर बैठें
• गहरी श्वास–प्रश्वास
• 3–5 बार “ॐ” जप
• सकारात्मक संकल्प

5 – 12 मिनट 🚶‍♀️ हल्का वार्म-अप
• गर्दन घुमाना (धीरे)
• कंधे ऊपर-नीचे
• हाथों का गोल घुमाव
• कलाई व टखना घुमाना
• स्थान पर हल्की चाल

12 – 30 मिनट 🧘‍♀️ सरल आसन
• ताड़ासन – 3 मिनट
• वृक्षासन (दीवार सहारे) – 3 मिनट
• कटिचक्रासन – 3 मिनट
• मार्जारी जैसी हल्की पीठ मूवमेंट (खड़े होकर) – 3 मिनट
• पवनमुक्तासन (लेटकर, एक-एक पैर) – 5 मिनट
• सेतुबंधासन (हल्का) – 4 मिनट

30 – 40 मिनट 🌬️ प्राणायाम
• अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
• भ्रामरी – 3 मिनट
• दीर्घ श्वसन – 2 मिनट

40 – 50 मिनट 🪑 कुर्सी योग (यदि जमीन पर कठिनाई हो)
• बैठे-बैठे पैर सीधा- मोड़
• हाथ ऊपर-नीचे खिंचाव
• हल्का ट्विस्ट (बिना झटके)

50 – 60 मिनट 🛌 शवासन व ध्यान
• पीठ के बल लेटें
• शरीर ढीला छोड़ें
• “सो-हम” ध्यान
• अंत में कृतज्ञता भावना

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🌿 लाभ
• जोड़ मजबूत
• संतुलन बेहतर
• शुगर व बीपी संतुलन में सहायक
• मानसिक शांति

Yoga Chart for Slipdisc & Knee Problem

 



जिन को कमर से आगे झुकना मना है (जैसे स्लिप डिस्क, गंभीर कमर दर्द) और घुटनों के बल बैठना मना है, उनके लिए नीचे 1 घंटे का सुरक्षित योग टाइम-टेबल दिया गया है। इसमें सभी अभ्यास खड़े होकर या पीठ के बल लेटकर किये जा सकते हैं।

⚠️ अभ्यास से पहले डॉक्टर/फिजियो की सलाह लें। दर्द होने पर तुरंत रुकें।

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🕉️ 1 घंटे का सुरक्षित योग टाइम-टेबल
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0 – 5 मिनट 🧘‍♂️ प्रारंभिक श्वसन (खड़े होकर या कुर्सी पर)
• गहरी श्वास–प्रश्वास
• कंधे ढीले छोड़ें
• 5 बार लंबा “ॐ” उच्चारण

5 – 12 मिनट 🚶‍♂️ सौम्य वार्म-अप (खड़े होकर)
• गर्दन दायें-बायें, ऊपर-नीचे (धीरे)
• कंधे घुमाना
• हाथों का आगे-पीछे घुमाव
• टखनों का घुमाव
• स्थान पर हल्की चाल

12 – 25 मिनट 🧍 खड़े होकर आसन (बिना आगे झुके)
• ताड़ासन – 3 मिनट
• अर्धचक्रासन (हल्का पीछे झुकाव) – 3 मिनट
• कटिचक्रासन (हल्का ट्विस्ट, आगे झुकाव नहीं) – 4 मिनट
• त्रिकोणासन (हल्का, हाथ जांघ तक ही) – 3 मिनट
• दीवार के सहारे संतुलन अभ्यास – 3 मिनट

25 – 40 मिनट 🛏️ पीठ के बल लेटकर आसन
• पवनमुक्तासन (एक-एक पैर, बिना जोर) – 5 मिनट
• सेतुबंध सर्वांगासन (हल्का ब्रिज) – 5 मिनट
• सुप्त ताड़ासन (लेटकर खिंचाव) – 3 मिनट
• एंकल पंपिंग व लेग रोटेशन – 2 मिनट

40 – 50 मिनट 🌬️ प्राणायाम (सीधे बैठकर या कुर्सी पर)
• अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
• भ्रामरी – 3 मिनट
• गहरी डायाफ्राम श्वास – 2 मिनट

50 – 60 मिनट 🛌 शवासन व ध्यान
• पूरे शरीर को ढीला छोड़ें
• श्वास पर ध्यान
• सकारात्मक संकल्प

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❌ क्या न करें
• कोई भी आगे झुकने वाला आसन (जैसे पश्चिमोत्तानासन)
• घुटनों के बल बैठने वाले आसन (वज्रासन आदि)
• झटके या तेज गति वाले अभ्यास



Yoga Chart for Diabetes & Hearing Loss Problem

 


    डायबिटीज़ और सुनने की कमी (Hearing Loss) वाले साधकों के लिए 1 घंटे का संतुलित योग कार्यक्रम नीचे दिया गया है। इसमें मधुमेह नियंत्रण, रक्तसंचार सुधार, तंत्रिका सशक्तिकरण और कान–नाड़ी संतुलन पर ध्यान रखा गया है। अभ्यास खाली पेट या हल्के नाश्ते के 3 घंटे बाद करें।

    0 – 5 मिनट 🧘‍♂️ प्रारम्भिक शांति अभ्यास

• सुखासन में बैठें
• गहरी श्वास–प्रश्वास (दीर्घ श्वसन)
• ध्यान कानों और नाभि क्षेत्र पर
• 5 बार ओम् का मानसिक जप

    5 – 10 मिनट 🚶‍♂️ वार्म-अप
• गर्दन घुमाना (धीरे-धीरे)
• कंधा घुमाना
• कलाई व टखना घुमाना
• घुटना मोड़-सीधा करना
• हल्का स्थान पर मार्च

    10 – 20 मिनट 🧎‍♂️ मधुमेह हेतु आसन
• ताड़ासन – 2 मिनट
• कटिचक्रासन – 2 मिनट
• मंडूकासन – 2 मिनट
• अर्धमत्स्येन्द्रासन – 3 मिनट
• भुजंगासन – 2 मिनट
• पवनमुक्तासन – 2 मिनट

    20 – 30 मिनट 🧘‍♀️ श्रवण शक्ति व नसों के लिए
• गोमुखासन – 3 मिनट
• सिंहासन – 3 मिनट (जीभ बाहर निकालकर श्वास)
• ब्रह्म मुद्रा (गर्दन चारों दिशा में) – 4 मिनट

    30 – 45 मिनट 🌬️ प्राणायाम
• कपालभाति (हल्की गति, 3 राउंड × 30)
• अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
• भ्रामरी प्राणायाम – 5 मिनट (कानों को अंगूठे से बंद कर)
• नाड़ी शोधन – 3 मिनट

    45 – 55 मिनट 🧘 ध्यान
• श्वास पर ध्यान
• “सो-हम” जप
• कानों में आंतरिक ध्वनि (नाद) को सुनने का प्रयास

    55 – 60 मिनट 🛌 शवासन
• पूर्ण विश्राम
• शरीर के प्रत्येक अंग को ढीला छोड़ें

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⚠️ सावधानियाँ
• शुगर बहुत कम या बहुत अधिक हो तो अभ्यास न करें
• तेज कपालभाति न करें
• चक्कर आए तो तुरंत रुकें
• डॉक्टर की सलाह आवश्यक




शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

स्वास्थ्य सूक्ति (HEALTH QUOTES)




1 आयुर्वेद का पालन करने वाला व्यक्ति धर्म, अर्थ और सुख का अधिकारी बनता है।
2 दोष, अग्नि और मन संतुलित हों तो वही सच्चा स्वास्थ्य है।
3 हितकर आहार, संयम और सदाचार मनुष्य को निरोग बनाते हैं।
4 जो मिताहारी है वही दीर्घायु और स्वस्थ रहता है।
5 पेट को पूर्ण न भरकर संयम रखना ही स्वास्थ्य का रहस्य है।
6 संयमित जीवनशैली दुःखों का नाश करती है।
7 अधिकता और अत्यल्पता दोनों ही स्वास्थ्य के शत्रु हैं।
8 शुद्ध आहार से मन शुद्ध होता है और मन की शुद्धि से बुद्धि स्थिर होती है।
9 शरीर धर्म और साधना का प्रथम साधन है, इसकी रक्षा आवश्यक है।
10 चारों पुरुषार्थों का मूल आधार आरोग्य है।
11 व्यायाम शरीर को बल, ऊर्जा और हलकापन देता है।
12 नियमित श्रम से पाचनशक्ति और उत्साह बढ़ता है।
13 अति स्नेह, अति निद्रा और अति भोग रोग उत्पन्न करते हैं।
14 रोगों का मूल कारण दोषों का असंतुलन है।
15 स्वच्छता आधा स्वास्थ्य है।
16 बाह्य और आंतरिक शुद्धि मनुष्य को रोगों से बचाती है।
17 तप और अनुशासन शरीर को शुद्ध और सशक्त बनाते हैं।
18 प्राणायाम जीवनशक्ति को जाग्रत करता है और रोग घटाता है।
19 मितभोजन स्वास्थ्य का सबसे सरल नियम है।
20 क्षमा और शांति मानसिक स्वास्थ्य का आधार हैं।
21 क्रोध शरीर और मन दोनों को जलाता है।
22 ध्यान मन को स्थिर कर शरीर को संतुलित करता है।
23 प्रसन्नता श्रेष्ठ औषधि है।
24 जल जीवन और स्वास्थ्य का मूल है।
25 संतुलित और समय पर निद्रा शरीर को पुनर्जीवित करती है।
26 हर प्रकार की अति स्वास्थ्य को नष्ट करती है।
27 समय पर भोजन ही पथ्य है।
28 प्रकृति के नियमों के अनुसार चलना निरोगता देता है।
29 सत्वगुण से बल और स्वास्थ्य बढ़ता है।
30 अहितकर आहार रोगों को आमंत्रण देता है।
31 वात, पित्त और कफ का संतुलन ही स्वास्थ्य है।
32 मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है, इसलिए मन की रक्षा करें।
33 समदृष्टि मन को शांत और शरीर को स्वस्थ रखती है।
34 ब्रह्मचर्य से ऊर्जा और ओज बढ़ता है।
35 संतोष मानसिक संतुलन और आनंद देता है।
36 अभ्यास और वैराग्य से मन नियंत्रित होता है।
37 कर्म में कुशलता तनाव को घटाती है।
38 समभाव से मानसिक रोग दूर होते हैं।
39 स्वास्थ्य सबसे बड़ा भाग्य है।
40 दीर्घायु ज्ञान और बल से समर्थ बनती है।
41 मधुर और हितकर वाणी मन को प्रसन्न रखती है।
42 शुद्ध जीवनशैली आयु और बल बढ़ाती है।
43 नियमित प्राणायाम जीवन में स्थिरता लाता है।
44 सत्संग मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य बढ़ाता है।
45 समयानुसार भोजन शरीर को संतुलित रखता है।
46 विषयों में अत्यधिक आसक्ति रोगों का कारण है।
47 इन्द्रियनिग्रह स्वास्थ्य का रक्षक है।
48 मन की प्रसन्नता रोगों का प्रतिरोधक है।
49 धैर्य हर संकट में स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
50 आत्मसंयम निरोग जीवन की जड़ है।

निरोगता, संतुलन और दीर्घायु संबंधी श्लोक


1.
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥
भगवद्गीता 6.17
अर्थ: संयमित जीवन दुःखों का नाश करता है।

2.
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन॥
भगवद्गीता 6.16
अर्थ: हर प्रकार की अति योग और स्वास्थ्य में बाधक है।

3.
योगः कर्मसु कौशलम्॥
भगवद्गीता 2.50
अर्थ: कुशल कर्म ही योग है।

4.
समत्वं योग उच्यते॥
भगवद्गीता 2.48
अर्थ: समभाव ही योग है।

5.
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते॥
भगवद्गीता 6.35
अर्थ: अभ्यास और वैराग्य से मन वश में होता है।

6.
आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन॥
भगवद्गीता 6.32
अर्थ: समदृष्टि मानसिक संतुलन देती है।

7.
आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः॥
छांदोग्य उपनिषद् 7.26.2
अर्थ: शुद्ध आहार से मन और बुद्धि शुद्ध होते हैं।

8.
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः॥
अमृतबिंदु उपनिषद्
अर्थ: मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है।

9.
ब्रह्मचर्ये प्रतिष्ठायां वीर्यलाभः॥
पतंजलि योगसूत्र 2.38
अर्थ: ब्रह्मचर्य से ओज और शक्ति बढ़ती है।

10.
शौचात् स्वाङ्गजुगुप्सा परैरसंसर्गः॥
पतंजलि 2.40
अर्थ: शुद्धि से अशुद्ध संग से बचाव होता है।

11.
संतोषादनुत्तमसुखलाभः॥
पतंजलि 2.42
अर्थ: संतोष से श्रेष्ठ सुख मिलता है।

12.
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्॥
कालिदास
अर्थ: शरीर साधना का प्रथम साधन है।

13.
आयुः कामयमानेन धर्मार्थसुखसाधनम्।
आयुर्वेदोपदेशेषु विधेयो परमादरः॥
चरक संहिता
अर्थ: आयुर्वेद का पालन जीवन को सफल बनाता है।

14.
नित्यं हिताहारविहारसेवी... भवत्यरोगः॥
चरक संहिता
अर्थ: हितकर आहार-विहार निरोगता देता है।

15.
समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥
सुश्रुत संहिता
अर्थ: दोष और मन का संतुलन ही स्वास्थ्य है।

16.
मात्राशी स्यात्॥
अष्टाङ्गहृदयम्
अर्थ: मिताहार स्वास्थ्य का मूल है।

17.
अर्धं भोजनस्य पथ्यं जलस्य च चतुर्थकम्।
शेषं वायोः प्रयच्छेत्॥
अष्टाङ्गहृदयम्
अर्थ: संतुलित मात्रा में भोजन स्वास्थ्यकर है।


सूक्ति-रूप (परंपरागत स्वास्थ्य-वचन)

18. धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥
अर्थ: चारों पुरुषार्थों का आधार आरोग्य है।

19. व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्॥
अर्थ: व्यायाम से बल और आयु बढ़ती है।

20. लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्बलवर्णता॥
अर्थ: व्यायाम से पाचन और बल बढ़ता है।

21. सर्वेषामेव रोगाणां निदानं कुपिताः दोषाः॥
अर्थ: दोषों का असंतुलन रोग का कारण है।

22. वातपित्तकफाः दोषाः॥
अर्थ: तीन दोष स्वास्थ्य का आधार हैं।

23. अतिस्नेहात् अतिस्वप्नात् रोगाः जायन्ति देहिनाम्॥
अर्थ: अति भोग रोग का कारण है।

24. नित्यं स्नानं शुचिर्भवेत्॥
अर्थ: स्वच्छता स्वास्थ्य की रक्षा करती है।

25. तपसा देहशुद्धिः॥
अर्थ: अनुशासन शरीर को शुद्ध करता है।

26. प्राणायामेन रोगक्षयः॥
अर्थ: प्राणायाम रोग घटाता है।

27. मितभोजनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: कम और संतुलित भोजन स्वास्थ्य देता है।

28. क्षमा शान्तिः स्वास्थ्यहेतुः॥
अर्थ: क्षमा मानसिक स्वास्थ्य का कारण है।

29. अक्रोधः परमं सुखम्॥
अर्थ: क्रोध त्यागने से सुख मिलता है।

30. ध्यानं निरोगतायै मार्गः॥
अर्थ: ध्यान मन और शरीर को संतुलित करता है।

31. हास्यं हि औषधं श्रेष्ठम्॥
अर्थ: प्रसन्नता श्रेष्ठ औषधि है।

32. जलमेव जीवनम्॥
अर्थ: जल जीवन का आधार है।

33. निद्रा सम्यग्भवेत् आरोग्यकरा॥
अर्थ: उचित नींद स्वास्थ्य देती है।

34. अतियोगः सर्वत्र वर्जनीयः॥
अर्थ: हर अति त्याज्य है।

35. भोजनं कालभोज्यं स्यात्॥
अर्थ: समय पर भोजन आवश्यक है।

36. प्रकृतिस्थो निरामयः॥
अर्थ: प्रकृति अनुसार जीवन निरोग बनाता है।

37. सत्त्वं बलं आरोग्यम्॥
अर्थ: सत्त्वगुण से बल और स्वास्थ्य बढ़ता है।

38. अहिताहारसेवनात् रोगाः॥
अर्थ: अहितकर आहार रोग देता है।

39. आरोग्यं परमं भाग्यम्॥
अर्थ: स्वास्थ्य सबसे बड़ा सौभाग्य है।

40. दीर्घमायुर्विद्या बलम्॥
अर्थ: दीर्घायु से ज्ञान और बल पुष्ट होते हैं।

41. हिता मितं प्रियं वाक्यम्॥
अर्थ: मधुर वाणी मानसिक संतुलन देती है।

42. आयुः बलं सुखं स्वास्थ्यं लभते शुद्धजीवनात्॥
अर्थ: शुद्ध जीवनशैली से आयु और बल बढ़ता है।

43. नित्यं प्राणायामः कर्तव्यः॥
अर्थ: नियमित प्राणायाम लाभकारी है।

44. सत्संगात् भवति स्वास्थ्यवृद्धिः॥
अर्थ: सत्संग मानसिक स्वास्थ्य देता है।

45. काले भोजनं आरोग्यकरम्॥
अर्थ: समयानुसार भोजन स्वास्थ्यकर है।

46. विषयासक्ति रोगहेतुः॥
अर्थ: विषयों में अति आसक्ति रोग देती है।

47. शमदमादि साधनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: इन्द्रियनिग्रह स्वास्थ्य का रक्षक है।

48. मनःप्रसादः सर्वरोगनिवारकः॥
अर्थ: प्रसन्न मन रोगों से बचाता है।

49. धैर्यं सर्वत्र साधनम्॥
अर्थ: धैर्य संकट में स्वास्थ्य बचाता है।

50. आत्मसंयमः स्वास्थ्यस्य मूलम्॥
अर्थ: आत्मसंयम निरोग जीवन की जड़ है।

51. संतुलितजीवनं दीर्घायुष्यम्॥
अर्थ: संतुलित जीवन दीर्घायु देता है।

52. श्रम एव स्वास्थ्यस्य मित्रम्॥
अर्थ: श्रम स्वास्थ्य का मित्र है।

53. आलस्यं रोगस्य मूलम्॥
अर्थ: आलस्य रोग का कारण है।

54. हितभोजनं बलवर्धनम्॥
अर्थ: हितकर भोजन बल बढ़ाता है।

55. शुद्धवायुसेवनं आरोग्यकरम्॥
अर्थ: शुद्ध वायु स्वास्थ्य देती है।

56. सूर्यसेवनं आयुवर्धनम्॥
अर्थ: सूर्यप्रकाश जीवनशक्ति बढ़ाता है।

57. नियमपालनं स्वास्थ्यरक्षणम्॥
अर्थ: नियम स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।

58. संयमः सर्वत्र रक्षणीयः॥
अर्थ: संयम जीवन की ढाल है।

59. प्रसन्नचित्तः निरामयः॥
अर्थ: प्रसन्न मन वाला व्यक्ति निरोग रहता है।

60. धर्मयुक्तजीवनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: धर्मानुकूल जीवन से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।