1.
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥
— भगवद्गीता 6.17
अर्थ: संयमित जीवन दुःखों का नाश करता है।
2.
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन॥
— भगवद्गीता 6.16
अर्थ: हर प्रकार की अति योग और स्वास्थ्य में बाधक है।
3.
योगः कर्मसु कौशलम्॥
— भगवद्गीता 2.50
अर्थ: कुशल कर्म ही योग है।
4.
समत्वं योग उच्यते॥
— भगवद्गीता 2.48
अर्थ: समभाव ही योग है।
5.
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते॥
— भगवद्गीता 6.35
अर्थ: अभ्यास और वैराग्य से मन वश में होता है।
6.
आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन॥
— भगवद्गीता 6.32
अर्थ: समदृष्टि मानसिक संतुलन देती है।
7.
आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः॥
— छांदोग्य उपनिषद् 7.26.2
अर्थ: शुद्ध आहार से मन और बुद्धि शुद्ध होते हैं।
8.
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः॥
— अमृतबिंदु उपनिषद्
अर्थ: मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है।
9.
ब्रह्मचर्ये प्रतिष्ठायां वीर्यलाभः॥
— पतंजलि योगसूत्र 2.38
अर्थ: ब्रह्मचर्य से ओज और शक्ति बढ़ती है।
10.
शौचात् स्वाङ्गजुगुप्सा परैरसंसर्गः॥
— पतंजलि 2.40
अर्थ: शुद्धि से अशुद्ध संग से बचाव होता है।
11.
संतोषादनुत्तमसुखलाभः॥
— पतंजलि 2.42
अर्थ: संतोष से श्रेष्ठ सुख मिलता है।
12.
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्॥
— कालिदास
अर्थ: शरीर साधना का प्रथम साधन है।
13.
आयुः कामयमानेन धर्मार्थसुखसाधनम्।
आयुर्वेदोपदेशेषु विधेयो परमादरः॥
— चरक संहिता
अर्थ: आयुर्वेद का पालन जीवन को सफल बनाता है।
14.
नित्यं हिताहारविहारसेवी... भवत्यरोगः॥
— चरक संहिता
अर्थ: हितकर आहार-विहार निरोगता देता है।
15.
समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥
— सुश्रुत संहिता
अर्थ: दोष और मन का संतुलन ही स्वास्थ्य है।
16.
मात्राशी स्यात्॥
— अष्टाङ्गहृदयम्
अर्थ: मिताहार स्वास्थ्य का मूल है।
17.
अर्धं भोजनस्य पथ्यं जलस्य च चतुर्थकम्।
शेषं वायोः प्रयच्छेत्॥
— अष्टाङ्गहृदयम्
अर्थ: संतुलित मात्रा में भोजन स्वास्थ्यकर है।
सूक्ति-रूप (परंपरागत स्वास्थ्य-वचन)
18. धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥
अर्थ: चारों पुरुषार्थों का आधार आरोग्य है।
19. व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्॥
अर्थ: व्यायाम से बल और आयु बढ़ती है।
20. लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्बलवर्णता॥
अर्थ: व्यायाम से पाचन और बल बढ़ता है।
21. सर्वेषामेव रोगाणां निदानं कुपिताः दोषाः॥
अर्थ: दोषों का असंतुलन रोग का कारण है।
22. वातपित्तकफाः दोषाः॥
अर्थ: तीन दोष स्वास्थ्य का आधार हैं।
23. अतिस्नेहात् अतिस्वप्नात् रोगाः जायन्ति देहिनाम्॥
अर्थ: अति भोग रोग का कारण है।
24. नित्यं स्नानं शुचिर्भवेत्॥
अर्थ: स्वच्छता स्वास्थ्य की रक्षा करती है।
25. तपसा देहशुद्धिः॥
अर्थ: अनुशासन शरीर को शुद्ध करता है।
26. प्राणायामेन रोगक्षयः॥
अर्थ: प्राणायाम रोग घटाता है।
27. मितभोजनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: कम और संतुलित भोजन स्वास्थ्य देता है।
28. क्षमा शान्तिः स्वास्थ्यहेतुः॥
अर्थ: क्षमा मानसिक स्वास्थ्य का कारण है।
29. अक्रोधः परमं सुखम्॥
अर्थ: क्रोध त्यागने से सुख मिलता है।
30. ध्यानं निरोगतायै मार्गः॥
अर्थ: ध्यान मन और शरीर को संतुलित करता है।
31. हास्यं हि औषधं श्रेष्ठम्॥
अर्थ: प्रसन्नता श्रेष्ठ औषधि है।
32. जलमेव जीवनम्॥
अर्थ: जल जीवन का आधार है।
33. निद्रा सम्यग्भवेत् आरोग्यकरा॥
अर्थ: उचित नींद स्वास्थ्य देती है।
34. अतियोगः सर्वत्र वर्जनीयः॥
अर्थ: हर अति त्याज्य है।
35. भोजनं कालभोज्यं स्यात्॥
अर्थ: समय पर भोजन आवश्यक है।
36. प्रकृतिस्थो निरामयः॥
अर्थ: प्रकृति अनुसार जीवन निरोग बनाता है।
37. सत्त्वं बलं आरोग्यम्॥
अर्थ: सत्त्वगुण से बल और स्वास्थ्य बढ़ता है।
38. अहिताहारसेवनात् रोगाः॥
अर्थ: अहितकर आहार रोग देता है।
39. आरोग्यं परमं भाग्यम्॥
अर्थ: स्वास्थ्य सबसे बड़ा सौभाग्य है।
40. दीर्घमायुर्विद्या बलम्॥
अर्थ: दीर्घायु से ज्ञान और बल पुष्ट होते हैं।
41. हिता मितं प्रियं वाक्यम्॥
अर्थ: मधुर वाणी मानसिक संतुलन देती है।
42. आयुः बलं सुखं स्वास्थ्यं लभते शुद्धजीवनात्॥
अर्थ: शुद्ध जीवनशैली से आयु और बल बढ़ता है।
43. नित्यं प्राणायामः कर्तव्यः॥
अर्थ: नियमित प्राणायाम लाभकारी है।
44. सत्संगात् भवति स्वास्थ्यवृद्धिः॥
अर्थ: सत्संग मानसिक स्वास्थ्य देता है।
45. काले भोजनं आरोग्यकरम्॥
अर्थ: समयानुसार भोजन स्वास्थ्यकर है।
46. विषयासक्ति रोगहेतुः॥
अर्थ: विषयों में अति आसक्ति रोग देती है।
47. शमदमादि साधनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: इन्द्रियनिग्रह स्वास्थ्य का रक्षक है।
48. मनःप्रसादः सर्वरोगनिवारकः॥
अर्थ: प्रसन्न मन रोगों से बचाता है।
49. धैर्यं सर्वत्र साधनम्॥
अर्थ: धैर्य संकट में स्वास्थ्य बचाता है।
50. आत्मसंयमः स्वास्थ्यस्य मूलम्॥
अर्थ: आत्मसंयम निरोग जीवन की जड़ है।
51. संतुलितजीवनं दीर्घायुष्यम्॥
अर्थ: संतुलित जीवन दीर्घायु देता है।
52. श्रम एव स्वास्थ्यस्य मित्रम्॥
अर्थ: श्रम स्वास्थ्य का मित्र है।
53. आलस्यं रोगस्य मूलम्॥
अर्थ: आलस्य रोग का कारण है।
54. हितभोजनं बलवर्धनम्॥
अर्थ: हितकर भोजन बल बढ़ाता है।
55. शुद्धवायुसेवनं आरोग्यकरम्॥
अर्थ: शुद्ध वायु स्वास्थ्य देती है।
56. सूर्यसेवनं आयुवर्धनम्॥
अर्थ: सूर्यप्रकाश जीवनशक्ति बढ़ाता है।
57. नियमपालनं स्वास्थ्यरक्षणम्॥
अर्थ: नियम स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।
58. संयमः सर्वत्र रक्षणीयः॥
अर्थ: संयम जीवन की ढाल है।
59. प्रसन्नचित्तः निरामयः॥
अर्थ: प्रसन्न मन वाला व्यक्ति निरोग रहता है।
60. धर्मयुक्तजीवनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: धर्मानुकूल जीवन से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
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