1 आयुर्वेद का पालन करने वाला व्यक्ति धर्म, अर्थ और सुख का अधिकारी बनता है।
2 दोष, अग्नि और मन संतुलित हों तो वही सच्चा स्वास्थ्य है।
3 हितकर आहार, संयम और सदाचार मनुष्य को निरोग बनाते हैं।
4 जो मिताहारी है वही दीर्घायु और स्वस्थ रहता है।
5 पेट को पूर्ण न भरकर संयम रखना ही स्वास्थ्य का रहस्य है।
6 संयमित जीवनशैली दुःखों का नाश करती है।
7 अधिकता और अत्यल्पता दोनों ही स्वास्थ्य के शत्रु हैं।
8 शुद्ध आहार से मन शुद्ध होता है और मन की शुद्धि से बुद्धि स्थिर होती है।
9 शरीर धर्म और साधना का प्रथम साधन है, इसकी रक्षा आवश्यक है।
10 चारों पुरुषार्थों का मूल आधार आरोग्य है।
11 व्यायाम शरीर को बल, ऊर्जा और हलकापन देता है।
12 नियमित श्रम से पाचनशक्ति और उत्साह बढ़ता है।
13 अति स्नेह, अति निद्रा और अति भोग रोग उत्पन्न करते हैं।
14 रोगों का मूल कारण दोषों का असंतुलन है।
15 स्वच्छता आधा स्वास्थ्य है।
16 बाह्य और आंतरिक शुद्धि मनुष्य को रोगों से बचाती है।
17 तप और अनुशासन शरीर को शुद्ध और सशक्त बनाते हैं।
18 प्राणायाम जीवनशक्ति को जाग्रत करता है और रोग घटाता है।
19 मितभोजन स्वास्थ्य का सबसे सरल नियम है।
20 क्षमा और शांति मानसिक स्वास्थ्य का आधार हैं।
21 क्रोध शरीर और मन दोनों को जलाता है।
22 ध्यान मन को स्थिर कर शरीर को संतुलित करता है।
23 प्रसन्नता श्रेष्ठ औषधि है।
24 जल जीवन और स्वास्थ्य का मूल है।
25 संतुलित और समय पर निद्रा शरीर को पुनर्जीवित करती है।
26 हर प्रकार की अति स्वास्थ्य को नष्ट करती है।
27 समय पर भोजन ही पथ्य है।
28 प्रकृति के नियमों के अनुसार चलना निरोगता देता है।
29 सत्वगुण से बल और स्वास्थ्य बढ़ता है।
30 अहितकर आहार रोगों को आमंत्रण देता है।
31 वात, पित्त और कफ का संतुलन ही स्वास्थ्य है।
32 मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है, इसलिए मन की रक्षा करें।
33 समदृष्टि मन को शांत और शरीर को स्वस्थ रखती है।
34 ब्रह्मचर्य से ऊर्जा और ओज बढ़ता है।
35 संतोष मानसिक संतुलन और आनंद देता है।
36 अभ्यास और वैराग्य से मन नियंत्रित होता है।
37 कर्म में कुशलता तनाव को घटाती है।
38 समभाव से मानसिक रोग दूर होते हैं।
39 स्वास्थ्य सबसे बड़ा भाग्य है।
40 दीर्घायु ज्ञान और बल से समर्थ बनती है।
41 मधुर और हितकर वाणी मन को प्रसन्न रखती है।
42 शुद्ध जीवनशैली आयु और बल बढ़ाती है।
43 नियमित प्राणायाम जीवन में स्थिरता लाता है।
44 सत्संग मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य बढ़ाता है।
45 समयानुसार भोजन शरीर को संतुलित रखता है।
46 विषयों में अत्यधिक आसक्ति रोगों का कारण है।
47 इन्द्रियनिग्रह स्वास्थ्य का रक्षक है।
48 मन की प्रसन्नता रोगों का प्रतिरोधक है।
49 धैर्य हर संकट में स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
50 आत्मसंयम निरोग जीवन की जड़ है।
शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026
स्वास्थ्य सूक्ति (HEALTH QUOTES)
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