गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

आयुर्वेदिक दोष (वात-पित्त-कफ) अनुसार व्यक्तिगत डाइट प्लान

 


आयुर्वेदिक दोष (वात-पित्त-कफ) अनुसार शाकाहारी/सात्विक डाइट प्लान 

— मोटापा घटाने के साथ संतुलन बनाए रखने हेतु।

(आधार: चरक संहिता और अष्टांग हृदयम् की आहार-सिद्धांत परंपरा)

पहले अपना प्रमुख दोष पहचानें:
वात – दुबला/शुष्क त्वचा, ठंड जल्दी लगती, गैस-कब्ज प्रवृत्ति।
पित्त – गरमी अधिक, तेज पाचन, चिड़चिड़ापन।
कफ – भारीपन, सुस्ती, वजन जल्दी बढ़ना।

🌬️ 1) वात दोष हेतु (गरम, तैलयुक्त, सुपाच्य)

लक्ष्य: अग्नि संतुलन, कब्ज व गैस कम करना

सुबह: गुनगुना पानी + 2–3 भीगे बादाम
नाश्ता: दलिया/ओट्स घी की ½ चम्मच के साथ, या मूंग दाल चीला
दोपहर: 2 रोटी + मूंग/मसूर दाल + लौकी/तुरई + सलाद कम मात्रा
शाम: अदरक-तुलसी चाय
रात: खिचड़ी (घी की थोड़ी मात्रा) या मूंग सूप

✔ तिल का तेल/घी थोड़ा उपयोगी
❌ कच्चा सलाद अधिक न लें
❌ ठंडा, फ्रिज का भोजन न लें

🔥 2) पित्त दोष हेतु (शीतल, कम मसालेदार)

लक्ष्य: गरमी व एसिडिटी नियंत्रित

सुबह: ठंडा नहीं, सामान्य ताप का पानी + धनिया जल
नाश्ता: फल (मीठे जैसे पपीता/सेब), दलिया
दोपहर: 2 रोटी + तोरई/कद्दू + मूंग दाल + खीरा सलाद
शाम: नारियल पानी या सौंफ जल
रात: सब्जी सूप + हल्की खिचड़ी

✔ घी थोड़ा लाभकारी
✔ धनिया, सौंफ, इलायची उपयोगी
❌ बहुत तीखा, खट्टा, तला भोजन न लें

🌿 3) कफ दोष हेतु (हल्का, गरम, कम तैलयुक्त)

लक्ष्य: मेटाबॉलिज़्म तेज करना, वजन घटाना

सुबह: गुनगुना पानी + नींबू + शहद
नाश्ता: स्प्राउट सलाद / मूंग चीला
दोपहर: 1–2 रोटी + हरी सब्जी + दाल (कम मात्रा)
शाम: ग्रीन टी + भुना चना
रात: केवल सूप / उबली सब्जी

✔ काली मिर्च, अदरक, हल्दी उपयोगी
✔ सप्ताह में 1 दिन हल्का उपवास
❌ मिठाई, दही (रात में), नहीं  लें

📌 सभी दोषों के लिए सामान्य नियम

  • भोजन समय पर करें

  • 70% पेट भरें

  • भोजन के बाद 100 कदम चलें

  • रात का भोजन सूर्यास्त के बाद हल्का रखें

  • 7–8 घंटे नींद







30 दिन के मोटापा घटाने हेतु शाकाहारी / सात्विक डाइट चार्ट

 



30 दिन के मोटापा घटाने हेतु शाकाहारी / सात्विक डाइट चार्ट

(योग प्लान के साथ करने पर बेहतर परिणाम मिलेंगे)

👉 सिद्धांत: हल्का, सुपाच्य, कम तेल-मसाला, प्राकृतिक और मौसमी भोजन।

🌅 सुबह उठते ही (5:30–6:00 AM)

  • 1 गिलास गुनगुना पानी + नींबू
    या

  • गुनगुना पानी + 1 चम्मच शहद
    या

  • 5–6 भीगे हुए बादाम

🧘 योग के बाद (7:30–8:00 AM)

  • 1 फल (पपीता / सेब / अमरूद)
    या

  • नारियल पानी
    या

  • मूंग स्प्राउट सलाद (हल्का)

🍽 नाश्ता (8:30–9:00 AM)

(एक विकल्प चुनें)

  1. दलिया (सब्जी वाला)

  2. ओट्स + सब्जी

  3. मूंग दाल चीला (कम तेल)

  4. पोहा (हल्का)

  5. उपमा (कम तेल)

  • हरी चाय या हर्बल चाय (बिना चीनी)

🕛 दोपहर का भोजन (12:30–1:30 PM)

✔ 1–2 मल्टीग्रेन रोटी
✔ 1 कटोरी दाल
✔ 1 कटोरी हरी सब्जी
✔ बड़ा सलाद (खीरा, गाजर, टमाटर)
✔ छाछ (बिना नमक या हल्का सेंधा नमक)

👉 चावल सप्ताह में 2 बार से अधिक नहीं।

☕ शाम (4:30–5:00 PM)

  • ग्रीन टी / हर्बल टी

  • 1 मुट्ठी भुना चना या मखाना

🌙 रात का भोजन (7:00–8:00 PM)

(हल्का रखें)

  1. सब्जी + सलाद
    या

  2. मूंग दाल सूप
    या

  3. वेजिटेबल सूप  

  4. खिचड़ी (हल्की)

❌ रात में रोटी/चावल कम या न लें
❌ मीठा और तला भोजन बिल्कुल कम करें

📅 सप्ताह में 1 दिन (डिटॉक्स डे)

  • केवल फल + नारियल पानी
    या

  • सब्जी सूप + सलाद

🚫 किन चीजों से बचें

  • मैदा, बिस्किट, नमकीन

  • कोल्ड ड्रिंक

  • ज्यादा चीनी

  • तला-भुना भोजन

💧 पानी नियम

  • 2.5–3 लीटर पानी

  • भोजन के तुरंत बाद अधिक पानी न पिएँ

📌 30 दिन में संभावित परिणाम

✔ 3–6 किलो तक वजन कम (व्यक्ति अनुसार)
✔ पेट की सूजन कम
✔ ऊर्जा और हल्कापन महसूस होगा





30 दिन का मोटापा घटाने वाला योग प्लान

 



30 दिन का मोटापा घटाने वाला योग प्लान —

 धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाते हुए, ताकि शरीर सुरक्षित रूप से फैट बर्न करे और स्टैमिना बढ़े।

(सुबह खाली पेट करें, सप्ताह में 5–6 दिन अभ्यास, 1 दिन विश्राम)

🗓️ सप्ताह 1 (दिन 1–7) – शरीर को तैयार करना

समय: 40–45 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 4 राउंड
🔹 त्रिकोणासन – 1 मिनट प्रत्येक ओर
🔹 उत्कटासन – 2 बार
🔹 भुजंगासन – 3 बार
🔹 पवनमुक्तासन – 2 मिनट
🔹 कपालभाति – 2 मिनट
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: शरीर को सक्रिय करना, पाचन सुधारना।

🗓️ सप्ताह 2 (दिन 8–14) – फैट बर्न शुरू

समय: 50 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 6 राउंड
🔹 वीरभद्रासन – 1–1 मिनट
🔹 नौकासन – 3 बार
🔹 धनुरासन – 2–3 बार
🔹 कपालभाति – 3 मिनट
🔹 अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: पेट-कमर की चर्बी पर काम।

🗓️ सप्ताह 3 (दिन 15–21) – मेटाबॉलिज़्म बढ़ाना

समय: 55–60 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 8 राउंड
🔹 त्रिकोणासन + वीरभद्रासन (क्रम में)
🔹 नौकासन – 4 बार
🔹 भुजंगासन + धनुरासन
🔹 कपालभाति – 5 मिनट
🔹 हल्का प्लैंक (30–40 सेकंड × 2)
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: तेजी से कैलोरी बर्न और मसल टोनिंग।

🗓️ सप्ताह 4 (दिन 22–30) – तीव्र परिणाम चरण

समय: 60 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 10 राउंड (मध्यम गति)
🔹 वीरभद्रासन + उत्कटासन
🔹 नौकासन – 5 बार
🔹 धनुरासन – 3 बार
🔹 कपालभाति – 5 मिनट
🔹 अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: अधिकतम फैट लॉस, शरीर को टोन करना।

📌 अतिरिक्त सुझाव (महत्वपूर्ण)

✔ रात को हल्का भोजन लें
✔ चीनी, तला-भुना कम करें
✔ 7–8 घंटे नींद लें
✔ रोज़ 2–3 लीटर पानी पिएँ
✔ सप्ताह में 1 दिन पूर्ण विश्राम या हल्की वॉक

1 घंटे का मोटापा घटाने वाला योगा टाइमटेबल




 1 घंटे का मोटापा घटाने वाला योग टाइमटेबल — 

पेट की चर्बी, कमर और पूरे शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने के लिए संतुलित क्रम में बनाया गया है:

🕒 कुल समय – 60 मिनट

⏱ 0–5 मिनट : वार्म-अप

  • गर्दन घुमाना (आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ)

  • कंधे रोल करना

  • घुटना और टखना घुमाना

  • हल्की जॉगिंग या जगह पर मार्च

⏱ 5–20 मिनट : सूर्य नमस्कार

  • 6–8 राउंड (धीरे शुरू करें, फिर मध्यम गति)

  • कैलोरी बर्न और पूरे शरीर की सक्रियता

⏱ 20–35 मिनट : खड़े होकर किए जाने वाले आसन

  1. त्रिकोणासन – 1–1 मिनट दोनों ओर

  2. वीरभद्रासन – 1–1 मिनट दोनों ओर

  3. उत्कटासन – 2 बार, 30–40 सेकंड

  4. वृक्षासन – संतुलन हेतु 1–1 मिनट

⏱ 35–50 मिनट : पेट और कमर के लिए

  1. नौकासन – 3 बार, 20–30 सेकंड

  2. भुजंगासन – 3 बार

  3. धनुरासन – 2–3 बार

  4. पवनमुक्तासन – 2 मिनट

⏱ 50–55 मिनट : प्राणायाम

  • कपालभाति – 3 राउंड (प्रत्येक 1 मिनट)

  • अनुलोम-विलोम – 3–4 मिनट

⏱ 55–60 मिनट : रिलैक्सेशन

  • शवासन – 5 मिनट गहरी श्वास के साथ

📌 विशेष निर्देश

  • खाली पेट अभ्यास करें।

  • सप्ताह में कम से कम 5 दिन नियमितता रखें।

  • संतुलित आहार (कम तेल-मिठाई, अधिक सलाद-फल) अपनाएँ।

  • पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ।






मोटापा घटाने की कौन कौन से आसन है ?


 

मोटापा घटाने के लिए वे योगासन सबसे प्रभावी माने जाते हैं जो मेटाबॉलिज़्म बढ़ाएँ, पेट-कमर की चर्बी घटाएँ और पाचन सुधारें। नीचे प्रमुख आसन दिए हैं:

🧘‍♂️ खड़े होकर किए जाने वाले आसन

  1. सूर्य नमस्कार
    – पूरे शरीर की कसरत, कैलोरी बर्न, तेजी से वजन घटाने में सहायक।

  2. त्रिकोणासन
    – कमर और पेट की चर्बी कम करने में सहायक।

  3. वीरभद्रासन
    – जांघ, पेट और बाजू मजबूत करता है।

  4. उत्कटासन
    – थाई, कूल्हे और पेट की चर्बी घटाता है।

🧘‍♀️ पेट की चर्बी घटाने वाले आसन

  1. नौकासन
    – पेट की मांसपेशियाँ मजबूत, बेली फैट कम।

  2. पवनमुक्तासन
    – गैस, कब्ज दूर कर पेट कम करने में मदद।

  3. भुजंगासन
    – पेट और कमर की चर्बी घटाने में सहायक।

  4. धनुरासन
    – पूरे पेट क्षेत्र पर प्रभाव, मोटापा घटाने में लाभकारी।

🔥 तेजी से फैट बर्न करने के लिए

  1. कपालभाति (प्राणायाम)
    – मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है, पेट की चर्बी घटाने में अत्यंत प्रभावी।

  2. चक्रासन
    – पूरे शरीर की चर्बी कम करने में सहायक।

📌 अभ्यास कैसे करें?

  • रोज़ 30–45 मिनट नियमित अभ्यास करें।

  • खाली पेट सुबह करना श्रेष्ठ है।

  • साथ में संतुलित आहार रखें।

  • सप्ताह में 5 दिन अभ्यास करें।







योगासन कितने प्रकार की है ?

 


योगासन मुख्य रूप से कई प्रकार के माने जाते हैं। अलग–अलग ग्रंथों और परंपराओं में इनकी संख्या भिन्न बताई गई है।

📖 शास्त्रीय दृष्टि से

  • हठयोग प्रदीपिका में 15 प्रमुख आसनों का वर्णन है।

1 स्वस्तिकासन, 2. गोमुखासन, 3. वीरासन, 4. कूर्मासन, 5. कुक्कुटासन, 6. उत्तानकूर्मासन, 7. धनुरासन, 8. मत्स्येन्द्रासन, 9. पश्चिमोत्तानासन, 10. मयूरासन, 11. शवासन, 12. सिद्धासन, 13. पद्मासन, 14. सिंहासन, 15. भद्रासन।

  • घेरंड संहिता में 32 आसनों का वर्णन मिलता है।

1 सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. भद्रासन, 4. मुक्तासन, 5. वज्रासन, 6. स्वस्तिकासन, 7. सिंहासन, 8. गोमुखासन, 9. वीरासन, 10. धनुरासन, 11. मृतासन, 12. गुप्तासन, 13. मत्स्यासन, 14. मत्स्येन्द्रासन, 15. गोरक्षासन, 16. पश्चिमोत्तानासन, 17. उत्कटासन, 18. संकटासन, 19. मयूरासन, 20. कुक्कुटासन, 21. कूर्मासन, 22. उत्तानकूर्मासन, 23. मण्डूकासन, 24. उत्तानमण्डूकासन, 25. वृक्षासन, 26. गरुड़ासन, 27. वृषासन, 28. शलभासन, 29. मकरासन, 30. उष्ट्रासन, 31. भुजंगासन, 32. योगासन।

  • महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में आसनों की संख्या नहीं बताई गई, केवल “स्थिर और सुखद” आसन की बात कही गई है।

परंपरा के अनुसार 84  आसन माने जाते हैं, जिनमें से 84 मुख्य और 32 विशेष महत्वपूर्ण बताए गए हैं। परंपरा में 84 आसनों की सूची विभिन्न ग्रंथों व परंपराओं में भिन्न-भिन्न रूप से मिलती है, एक सार्वभौमिक मानक सूची उपलब्ध नहीं है। एक प्रचलित पारंपरिक क्रम इस प्रकार दिया जाता है —


1. सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. स्वस्तिकासन, 4. वज्रासन, 5. वीरासन, 6. भद्रासन, 7. मुक्तासन, 8. गोमुखासन, 9. मत्स्यासन, 10. मत्स्येन्द्रासन, 11. पश्चिमोत्तानासन, 12. मयूरासन, 13. कुक्कुटासन, 14. कूर्मासन, 15. उत्तानकूर्मासन, 16. धनुरासन, 17. शलभासन, 18. भुजंगासन, 19. मकरासन, 20. उष्ट्रासन, 21. वृक्षासन, 22. गरुड़ासन, 23. उत्कटासन, 24. ताड़ासन, 25. पर्वतासन, 26. नौकासन, 27. चक्रासन, 28. सर्वांगासन, 29. हलासन, 30. शीर्षासन, 31. सिंहासन, 32. गोरक्षासन, 33. मण्डूकासन, 34. उत्तानमण्डूकासन, 35. योगमुद्रासन, 36. पवनमुक्तासन, 37. अर्धमत्स्येन्द्रासन, 38. त्रिकोणासन, 39. अर्धचक्रासन, 40. कटिचक्रासन, 41. वृषासन, 42. शशांकासन, 43. बद्धकोणासन, 44. उत्तानपादासन, 45. सुप्तवज्रासन, 46. सुप्तपद्मासन, 47. तितलीासन, 48. अर्धपद्मासन, 49. कन्दासन, 50. पादहस्तासन, 51. उत्थितपादासन, 52. द्विपादशीर्षासन, 53. एकपादशीर्षासन, 54. अकर्णधनुरासन, 55. पार्श्वकोणासन, 56. उत्थितत्रिकोणासन, 57. परिवृत्तत्रिकोणासन, 58. अर्धचन्द्रासन, 59. परिवृत्तपार्श्वकोणासन, 60. प्लवासन, 61. काकासन, 62. बकासन, 63. हंसासन, 64. लोलासन, 65. तोलासन, 66. भेकासन, 67. शीतलीासन, 68. पार्वतीासन, 69. अनन्तासन, 70. शवासन, 71. योगनिद्रासन, 72. विपरीतकरणी, 73. सेतुबंधासन, 74. उर्ध्वमुखश्वानासन, 75. अधोमुखश्वानासन, 76. नटराजासन, 77. उत्तानासन, 78. पार्श्वोत्तानासन, 79. उष्ट्रासन, 80. दण्डासन, 81. अर्धशलभासन, 82. पूर्णशलभासन, 83. भुजपीडासन, 84. योगासन।


🧘‍♂️ अभ्यास की दृष्टि से योगासन के प्रकार

व्यवहारिक रूप में योगासन को इन श्रेणियों में बाँटा जाता है:

  1. बैठकर किए जाने वाले आसन
    1. सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. स्वस्तिकासन, 4. वज्रासन, 5. वीरासन, 6. भद्रासन, 7. मुक्तासन, 8. गोमुखासन, 9. मत्स्येन्द्रासन, 10. पश्चिमोत्तानासन, 11. गोरक्षासन, 12. मण्डूकासन, 13. उत्तानमण्डूकासन, 14. कूर्मासन, 15. उत्तान कूर्मासन, 16. योगमुद्रासन।

  2. खड़े होकर किए जाने वाले आसन
    जैसे – ताड़ासन, त्रिकोणासन

  3. पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन
    जैसे – शवासन, पवनमुक्तासन

  4. पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसन
    जैसे – भुजंगासन, शलभासन

  5. संतुलन वाले आसन
    जैसे – वृक्षासन, गरुड़ासन

  6. उल्टे (इन्वर्जन) आसन
    जैसे – शीर्षासन, सर्वांगासन

यदि संक्षेप में कहें तो –
👉 शास्त्रों में योगासन की संख्या सीमित (15, 32 आदि) बताई गई है,
👉 परंपरा में 84 मुख्य,
👉 और आधुनिक योग में सैकड़ों प्रकार प्रचलित हैं।


बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

आत्मानुसंधान -- selfanalysis

आत्मानुसंधान

भागवत की कथा करने वाले एक पण्डित कथा के बाद बहुत थक जाते थे। मस्तिष्क भारी-भारी रहता था। काफी इलाज किये लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। श्री घाटवाले बाबा ने उनको ज्ञानमुद्रा में बैठने की विधि बतायी। कुछ ही समय में पण्डित जी को चमत्कारिक लाभ हुआ। ज्ञानमुद्रा से मस्तिष्क के ज्ञानतंतुओं को पुष्टि मिलती है और चित्त जल्दी शांत हो जाता है। आत्म-कल्याण के इच्छुक व ईश्वरानुरागी साधकों को आत्मशांति व आत्मबल प्राप्त करने के लिए, चित्तशुद्धि के लिए यह ज्ञानमुद्रा बड़ी सहायक है। इस मुद्रा में प्रतिदिन थोड़ी देर बैठना चाहिए।

ब्रह्ममुहूर्त की अमृतवेला में शौच-स्नानादि से निवृत्त होकर गरम आसन बिछाकर पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन या सुखासन में बैठ जाओ। 10-15 प्राणायाम कर लो। आन्तर कुम्भक व बहिर्कुम्भक तथा मूलबन्ध, उड्डियानबन्ध व जालन्धरबन्ध-इस त्रिबन्ध के साथ प्राणायाम हो तो बहुत अच्छा। तदनन्तर दोनों हाथों की तर्जनी यानी पहली उँगली के नाखून को अँगूठों से हल्का सा दबाकर दोनों हाथों को घुटनों पर रखो। शेष तीन उँगलियाँ सीधी व परस्पर जुड़ी रहें। हथेली ऊपर की ओर रहे। गरदन व रीढ़ की हड्डी सीधी। आँखें अर्धोन्मीलित। शरीर अडोल।

अब गहरा श्वास लेकर 'ॐ का दीर्घ गुंजन करो। प्रारम्भ में ध्वनि कण्ठ से निकलेगी। फिर गहराई में जाकर हृदय से 'ॐ...' की ध्वनि निकालो। बाद में और गहरे जाकर नाभि या मूलाधार से ध्वनि उठाओ। इस ध्वनि से सुषुम्ना का द्वार खुलता है और जल्दी से आनन्द प्राप्त होता है। चंचल मन तब तक भटकता रहेगा जब तक उसे भीतर का आनन्द नहीं मिलेगा। ज्ञानमुद्रा के अभ्यास व 'ॐ...' के गुंजन से मन की भटकान शीघ्रता से कम होने लगेगी।

ध्यान में बैठने से पहले जो कार्य करना नितान्त आवश्यक हो उसे पूरा कर लो। ध्यान के समय जो काम करने की कोई जरूरत न हो उसका चिन्तन छोड़ दो। चिन्तन आ जाये तो 'ॐ...' का पावन गुंजन करके उस व्यर्थ चिन्तन से अपना पिण्ड छुड़ा लो।

वर्त्तमान का आदर करने से चित्त शुद्ध होता है। भूत-भविष्य की कल्पना छोड़कर वर्त्तमान में स्थित रहना यह वर्त्तमान का आदर हुआ। निज अनुभव का आदर करने से चित्त की अशुद्धि दूर होती है। निज अनुभव यह है कि जो भी काम होते हैं, सब वर्त्तमान में ही किया जाता है। पीछे की कल्पना करो तो भूतकाल और आगे की कल्पना करो तो भविष्य काल। भूत और भविष्य दोनों वर्त्तमान काल में ही सिद्ध होते हैं। वर्त्तमानकाल की सिद्धि भी 'मैं हूँ' इस अनुमति पर निर्भर है।

'मैं हूँ' यह तो सबका अनुभव है लेकिन 'मैं कौन हूँ' यह ठीक से पता नहीं है। संसार में प्रायः सभी लोग अपने को शरीर व उसके नाम को लेकर मानते हैं कि 'मैं अमुक हूँ... मैं गोविन्दभाई हूँ।' नहीं.... यह हमारी वास्तविक पहचान नहीं है। अब हम इस साधना के जरिये हम वास्तव में कौन हैं.... हमारा असली स्वरूप क्या है.... इसकी खोज करेंगे। अनन्त की यह खोज आनन्दमय यात्रा बन जायेगी।

मंगलमय यात्रा पर प्रस्थान करते समय वर्त्तमान का आदर करो। वर्त्तमान का आदर करने से आदमी भूत व भविष्य की कल्पना में लग जाना यह मन का स्वभाव है। अतः ज्ञानमुद्रा में बैठकर संकल्प करो कि अब हम 'ॐ...' की पावन ध्वनि के साथ वर्त्तमान घड़ियों का पूरा आदर करेंगे। मन कुछ देर टिकेगा.... फिर इधर-उधर के विचारों की जाल बुनने लग जायेगा। दीर्घ स्वर से 'ॐ...' का गुंजन करके मन को खींचकर पुनः वर्तमान में लाओ। मन को प्यार से, पुचकार से समझाओ। 8-10 बार 'ॐ....' का गुँजन करके शांत हो जाओ। वक्षःस्थल के भीतर तालबद्ध रूप से धड़कते हुए हृदय को मन से निहारते रहो.... निहारते रहो..... मानों शरीर को जीने के लिए उसी धड़कन के द्वारा विश्व-चैतन्य से सत्ता-स्फूर्ति प्राप्त हो रही है। हृदय की उस धड़कन के साथ 'ॐ... राम.... ॐ....राम....' मंत्र का अनुसंधान करते हुए मन को उससे जोड़ दो। हृदय की धड़कन को प्रकट करने वाले उस सर्वव्यापक परमात्मा को स्नेह करते जाओ। हमारी शक्ति को क्षीण करने वाली, हमारा आत्मिक खजाना लूटकर हमें बेहाल करने वाली भूत-भविष्य की कल्पनाएँ हृदय की इन वर्त्तमान धड़कनों का आदर करने से कम होने लगेंगी। हृदय में प्यार व आनंद उभरता जायेगा। जैसे मधुमक्खी सुमधुर सुगंधित पुष्प पाकर रस चूसने के लिए वहाँ चिपक जाती है, शहद का बिन्दु पाकर जैसे चींटी वहाँ आस्वाद लेने के लिए चिपक जाती है वैसे ही चित्तरूपी भ्रमर को परमात्मा के प्यार से प्रफुल्लित होते हुए अपने हृदय कमल पर बैठा दो, दृढ़ता से चिपका दो।

सागर की सतह पर दौड़ती हुई तरंगे कम हो जाती हैं तो सागर शांत दिखता है। सागर की गरिमा का एहसास होता है। चित्तरूपी सागर में वृत्तिरूपी लहरियाँ दौड़ रही हैं। वर्त्तमान का आदर करने से वे वृत्तियाँ कम होने लगेंगी। एक वृत्ति पूरी हुई और दूसरी अभी उठने को है, उन दोनों के बीच जो सन्धिकाल है वह बढ़ने लगा। बिना वृत्तियों की अनुपस्थिति में भी हम हैं। इस अवस्था में केवल आनंद-ही-आनंद है। वही हमारा असली स्वरूप है। इस निःसंकल्पावस्था का आनन्द बढ़ाते जाओ। मन विक्षेप डाले तो बीच-बीच में ॐ का प्यार गुंजन करके उस आनंद-सागर में मन को डुबाते जाओ। जब ऐसी निर्विषय, निःसंकल्प अवस्था में आनंद आने लगे तो समझो यही आत्मदर्शन हो रहा है क्योंकि आत्मा आनन्दस्वरूप है।

यह आनन्द संसार के सुख या हर्ष जैसा नहीं है। संसार के सुख में और आत्मसुख में बड़ा फासला है। संसार का सुख क्रिया से आता है, उपलब्ध फल का भोग करने से आता है जबकि आत्मसुख तमाम स्थूल-सूक्ष्म क्रियाओं से उपराम होने पर आता है। सांसारिक सुख में भोक्ता हर्षित होता है और साथ ही साथ बरबाद होता है। आत्मसुख में भोक्ता शांत होता है और आबाद होता है।

इस आत्म-ध्यान से, आत्म-चिन्तन से भोक्ता की बरबादी रुकती है। भोक्ता स्वयं आनंदस्वरूप परमात्मामय होने लगता है, स्वयं परमात्मा होने लगता है। परमात्मा होना क्या है.... अनादि काल से परमात्मा था ही, यह जानने लगता है।