शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

निरोगता, संतुलन और दीर्घायु संबंधी श्लोक


1.
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥
— भगवद्गीता 6.17
अर्थ: संयमित जीवन दुःखों का नाश करता है।

2.
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन॥
— भगवद्गीता 6.16
अर्थ: हर प्रकार की अति योग और स्वास्थ्य में बाधक है।

3.
योगः कर्मसु कौशलम्॥
— भगवद्गीता 2.50
अर्थ: कुशल कर्म ही योग है।

4.
समत्वं योग उच्यते॥
— भगवद्गीता 2.48
अर्थ: समभाव ही योग है।

5.
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते॥
— भगवद्गीता 6.35
अर्थ: अभ्यास और वैराग्य से मन वश में होता है।

6.
आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन॥
— भगवद्गीता 6.32
अर्थ: समदृष्टि मानसिक संतुलन देती है।

7.
आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः॥
— छांदोग्य उपनिषद् 7.26.2
अर्थ: शुद्ध आहार से मन और बुद्धि शुद्ध होते हैं।

8.
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः॥
— अमृतबिंदु उपनिषद्
अर्थ: मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है।

9.
ब्रह्मचर्ये प्रतिष्ठायां वीर्यलाभः॥
— पतंजलि योगसूत्र 2.38
अर्थ: ब्रह्मचर्य से ओज और शक्ति बढ़ती है।

10.
शौचात् स्वाङ्गजुगुप्सा परैरसंसर्गः॥
— पतंजलि 2.40
अर्थ: शुद्धि से अशुद्ध संग से बचाव होता है।

11.
संतोषादनुत्तमसुखलाभः॥
— पतंजलि 2.42
अर्थ: संतोष से श्रेष्ठ सुख मिलता है।

12.
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्॥
— कालिदास
अर्थ: शरीर साधना का प्रथम साधन है।

13.
आयुः कामयमानेन धर्मार्थसुखसाधनम्।
आयुर्वेदोपदेशेषु विधेयो परमादरः॥
— चरक संहिता
अर्थ: आयुर्वेद का पालन जीवन को सफल बनाता है।

14.
नित्यं हिताहारविहारसेवी... भवत्यरोगः॥
— चरक संहिता
अर्थ: हितकर आहार-विहार निरोगता देता है।

15.
समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥
— सुश्रुत संहिता
अर्थ: दोष और मन का संतुलन ही स्वास्थ्य है।

16.
मात्राशी स्यात्॥
— अष्टाङ्गहृदयम्
अर्थ: मिताहार स्वास्थ्य का मूल है।

17.
अर्धं भोजनस्य पथ्यं जलस्य च चतुर्थकम्।
शेषं वायोः प्रयच्छेत्॥
— अष्टाङ्गहृदयम्
अर्थ: संतुलित मात्रा में भोजन स्वास्थ्यकर है।


सूक्ति-रूप (परंपरागत स्वास्थ्य-वचन)

18. धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्॥
अर्थ: चारों पुरुषार्थों का आधार आरोग्य है।

19. व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्॥
अर्थ: व्यायाम से बल और आयु बढ़ती है।

20. लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्बलवर्णता॥
अर्थ: व्यायाम से पाचन और बल बढ़ता है।

21. सर्वेषामेव रोगाणां निदानं कुपिताः दोषाः॥
अर्थ: दोषों का असंतुलन रोग का कारण है।

22. वातपित्तकफाः दोषाः॥
अर्थ: तीन दोष स्वास्थ्य का आधार हैं।

23. अतिस्नेहात् अतिस्वप्नात् रोगाः जायन्ति देहिनाम्॥
अर्थ: अति भोग रोग का कारण है।

24. नित्यं स्नानं शुचिर्भवेत्॥
अर्थ: स्वच्छता स्वास्थ्य की रक्षा करती है।

25. तपसा देहशुद्धिः॥
अर्थ: अनुशासन शरीर को शुद्ध करता है।

26. प्राणायामेन रोगक्षयः॥
अर्थ: प्राणायाम रोग घटाता है।

27. मितभोजनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: कम और संतुलित भोजन स्वास्थ्य देता है।

28. क्षमा शान्तिः स्वास्थ्यहेतुः॥
अर्थ: क्षमा मानसिक स्वास्थ्य का कारण है।

29. अक्रोधः परमं सुखम्॥
अर्थ: क्रोध त्यागने से सुख मिलता है।

30. ध्यानं निरोगतायै मार्गः॥
अर्थ: ध्यान मन और शरीर को संतुलित करता है।

31. हास्यं हि औषधं श्रेष्ठम्॥
अर्थ: प्रसन्नता श्रेष्ठ औषधि है।

32. जलमेव जीवनम्॥
अर्थ: जल जीवन का आधार है।

33. निद्रा सम्यग्भवेत् आरोग्यकरा॥
अर्थ: उचित नींद स्वास्थ्य देती है।

34. अतियोगः सर्वत्र वर्जनीयः॥
अर्थ: हर अति त्याज्य है।

35. भोजनं कालभोज्यं स्यात्॥
अर्थ: समय पर भोजन आवश्यक है।

36. प्रकृतिस्थो निरामयः॥
अर्थ: प्रकृति अनुसार जीवन निरोग बनाता है।

37. सत्त्वं बलं आरोग्यम्॥
अर्थ: सत्त्वगुण से बल और स्वास्थ्य बढ़ता है।

38. अहिताहारसेवनात् रोगाः॥
अर्थ: अहितकर आहार रोग देता है।

39. आरोग्यं परमं भाग्यम्॥
अर्थ: स्वास्थ्य सबसे बड़ा सौभाग्य है।

40. दीर्घमायुर्विद्या बलम्॥
अर्थ: दीर्घायु से ज्ञान और बल पुष्ट होते हैं।

41. हिता मितं प्रियं वाक्यम्॥
अर्थ: मधुर वाणी मानसिक संतुलन देती है।

42. आयुः बलं सुखं स्वास्थ्यं लभते शुद्धजीवनात्॥
अर्थ: शुद्ध जीवनशैली से आयु और बल बढ़ता है।

43. नित्यं प्राणायामः कर्तव्यः॥
अर्थ: नियमित प्राणायाम लाभकारी है।

44. सत्संगात् भवति स्वास्थ्यवृद्धिः॥
अर्थ: सत्संग मानसिक स्वास्थ्य देता है।

45. काले भोजनं आरोग्यकरम्॥
अर्थ: समयानुसार भोजन स्वास्थ्यकर है।

46. विषयासक्ति रोगहेतुः॥
अर्थ: विषयों में अति आसक्ति रोग देती है।

47. शमदमादि साधनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: इन्द्रियनिग्रह स्वास्थ्य का रक्षक है।

48. मनःप्रसादः सर्वरोगनिवारकः॥
अर्थ: प्रसन्न मन रोगों से बचाता है।

49. धैर्यं सर्वत्र साधनम्॥
अर्थ: धैर्य संकट में स्वास्थ्य बचाता है।

50. आत्मसंयमः स्वास्थ्यस्य मूलम्॥
अर्थ: आत्मसंयम निरोग जीवन की जड़ है।

51. संतुलितजीवनं दीर्घायुष्यम्॥
अर्थ: संतुलित जीवन दीर्घायु देता है।

52. श्रम एव स्वास्थ्यस्य मित्रम्॥
अर्थ: श्रम स्वास्थ्य का मित्र है।

53. आलस्यं रोगस्य मूलम्॥
अर्थ: आलस्य रोग का कारण है।

54. हितभोजनं बलवर्धनम्॥
अर्थ: हितकर भोजन बल बढ़ाता है।

55. शुद्धवायुसेवनं आरोग्यकरम्॥
अर्थ: शुद्ध वायु स्वास्थ्य देती है।

56. सूर्यसेवनं आयुवर्धनम्॥
अर्थ: सूर्यप्रकाश जीवनशक्ति बढ़ाता है।

57. नियमपालनं स्वास्थ्यरक्षणम्॥
अर्थ: नियम स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।

58. संयमः सर्वत्र रक्षणीयः॥
अर्थ: संयम जीवन की ढाल है।

59. प्रसन्नचित्तः निरामयः॥
अर्थ: प्रसन्न मन वाला व्यक्ति निरोग रहता है।

60. धर्मयुक्तजीवनं स्वास्थ्यकरम्॥
अर्थ: धर्मानुकूल जीवन से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

आयुर्वेदिक दोष (वात-पित्त-कफ) अनुसार व्यक्तिगत डाइट प्लान

 


आयुर्वेदिक दोष (वात-पित्त-कफ) अनुसार शाकाहारी/सात्विक डाइट प्लान 

— मोटापा घटाने के साथ संतुलन बनाए रखने हेतु।

(आधार: चरक संहिता और अष्टांग हृदयम् की आहार-सिद्धांत परंपरा)

पहले अपना प्रमुख दोष पहचानें:
वात – दुबला/शुष्क त्वचा, ठंड जल्दी लगती, गैस-कब्ज प्रवृत्ति।
पित्त – गरमी अधिक, तेज पाचन, चिड़चिड़ापन।
कफ – भारीपन, सुस्ती, वजन जल्दी बढ़ना।

🌬️ 1) वात दोष हेतु (गरम, तैलयुक्त, सुपाच्य)

लक्ष्य: अग्नि संतुलन, कब्ज व गैस कम करना

सुबह: गुनगुना पानी + 2–3 भीगे बादाम
नाश्ता: दलिया/ओट्स घी की ½ चम्मच के साथ, या मूंग दाल चीला
दोपहर: 2 रोटी + मूंग/मसूर दाल + लौकी/तुरई + सलाद कम मात्रा
शाम: अदरक-तुलसी चाय
रात: खिचड़ी (घी की थोड़ी मात्रा) या मूंग सूप

✔ तिल का तेल/घी थोड़ा उपयोगी
❌ कच्चा सलाद अधिक न लें
❌ ठंडा, फ्रिज का भोजन न लें

🔥 2) पित्त दोष हेतु (शीतल, कम मसालेदार)

लक्ष्य: गरमी व एसिडिटी नियंत्रित

सुबह: ठंडा नहीं, सामान्य ताप का पानी + धनिया जल
नाश्ता: फल (मीठे जैसे पपीता/सेब), दलिया
दोपहर: 2 रोटी + तोरई/कद्दू + मूंग दाल + खीरा सलाद
शाम: नारियल पानी या सौंफ जल
रात: सब्जी सूप + हल्की खिचड़ी

✔ घी थोड़ा लाभकारी
✔ धनिया, सौंफ, इलायची उपयोगी
❌ बहुत तीखा, खट्टा, तला भोजन न लें

🌿 3) कफ दोष हेतु (हल्का, गरम, कम तैलयुक्त)

लक्ष्य: मेटाबॉलिज़्म तेज करना, वजन घटाना

सुबह: गुनगुना पानी + नींबू + शहद
नाश्ता: स्प्राउट सलाद / मूंग चीला
दोपहर: 1–2 रोटी + हरी सब्जी + दाल (कम मात्रा)
शाम: ग्रीन टी + भुना चना
रात: केवल सूप / उबली सब्जी

✔ काली मिर्च, अदरक, हल्दी उपयोगी
✔ सप्ताह में 1 दिन हल्का उपवास
❌ मिठाई, दही (रात में), नहीं  लें

📌 सभी दोषों के लिए सामान्य नियम

  • भोजन समय पर करें

  • 70% पेट भरें

  • भोजन के बाद 100 कदम चलें

  • रात का भोजन सूर्यास्त के बाद हल्का रखें

  • 7–8 घंटे नींद







30 दिन के मोटापा घटाने हेतु शाकाहारी / सात्विक डाइट चार्ट

 



30 दिन के मोटापा घटाने हेतु शाकाहारी / सात्विक डाइट चार्ट

(योग प्लान के साथ करने पर बेहतर परिणाम मिलेंगे)

👉 सिद्धांत: हल्का, सुपाच्य, कम तेल-मसाला, प्राकृतिक और मौसमी भोजन।

🌅 सुबह उठते ही (5:30–6:00 AM)

  • 1 गिलास गुनगुना पानी + नींबू
    या

  • गुनगुना पानी + 1 चम्मच शहद
    या

  • 5–6 भीगे हुए बादाम

🧘 योग के बाद (7:30–8:00 AM)

  • 1 फल (पपीता / सेब / अमरूद)
    या

  • नारियल पानी
    या

  • मूंग स्प्राउट सलाद (हल्का)

🍽 नाश्ता (8:30–9:00 AM)

(एक विकल्प चुनें)

  1. दलिया (सब्जी वाला)

  2. ओट्स + सब्जी

  3. मूंग दाल चीला (कम तेल)

  4. पोहा (हल्का)

  5. उपमा (कम तेल)

  • हरी चाय या हर्बल चाय (बिना चीनी)

🕛 दोपहर का भोजन (12:30–1:30 PM)

✔ 1–2 मल्टीग्रेन रोटी
✔ 1 कटोरी दाल
✔ 1 कटोरी हरी सब्जी
✔ बड़ा सलाद (खीरा, गाजर, टमाटर)
✔ छाछ (बिना नमक या हल्का सेंधा नमक)

👉 चावल सप्ताह में 2 बार से अधिक नहीं।

☕ शाम (4:30–5:00 PM)

  • ग्रीन टी / हर्बल टी

  • 1 मुट्ठी भुना चना या मखाना

🌙 रात का भोजन (7:00–8:00 PM)

(हल्का रखें)

  1. सब्जी + सलाद
    या

  2. मूंग दाल सूप
    या

  3. वेजिटेबल सूप  

  4. खिचड़ी (हल्की)

❌ रात में रोटी/चावल कम या न लें
❌ मीठा और तला भोजन बिल्कुल कम करें

📅 सप्ताह में 1 दिन (डिटॉक्स डे)

  • केवल फल + नारियल पानी
    या

  • सब्जी सूप + सलाद

🚫 किन चीजों से बचें

  • मैदा, बिस्किट, नमकीन

  • कोल्ड ड्रिंक

  • ज्यादा चीनी

  • तला-भुना भोजन

💧 पानी नियम

  • 2.5–3 लीटर पानी

  • भोजन के तुरंत बाद अधिक पानी न पिएँ

📌 30 दिन में संभावित परिणाम

✔ 3–6 किलो तक वजन कम (व्यक्ति अनुसार)
✔ पेट की सूजन कम
✔ ऊर्जा और हल्कापन महसूस होगा





30 दिन का मोटापा घटाने वाला योग प्लान

 



30 दिन का मोटापा घटाने वाला योग प्लान —

 धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाते हुए, ताकि शरीर सुरक्षित रूप से फैट बर्न करे और स्टैमिना बढ़े।

(सुबह खाली पेट करें, सप्ताह में 5–6 दिन अभ्यास, 1 दिन विश्राम)

🗓️ सप्ताह 1 (दिन 1–7) – शरीर को तैयार करना

समय: 40–45 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 4 राउंड
🔹 त्रिकोणासन – 1 मिनट प्रत्येक ओर
🔹 उत्कटासन – 2 बार
🔹 भुजंगासन – 3 बार
🔹 पवनमुक्तासन – 2 मिनट
🔹 कपालभाति – 2 मिनट
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: शरीर को सक्रिय करना, पाचन सुधारना।

🗓️ सप्ताह 2 (दिन 8–14) – फैट बर्न शुरू

समय: 50 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 6 राउंड
🔹 वीरभद्रासन – 1–1 मिनट
🔹 नौकासन – 3 बार
🔹 धनुरासन – 2–3 बार
🔹 कपालभाति – 3 मिनट
🔹 अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: पेट-कमर की चर्बी पर काम।

🗓️ सप्ताह 3 (दिन 15–21) – मेटाबॉलिज़्म बढ़ाना

समय: 55–60 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 8 राउंड
🔹 त्रिकोणासन + वीरभद्रासन (क्रम में)
🔹 नौकासन – 4 बार
🔹 भुजंगासन + धनुरासन
🔹 कपालभाति – 5 मिनट
🔹 हल्का प्लैंक (30–40 सेकंड × 2)
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: तेजी से कैलोरी बर्न और मसल टोनिंग।

🗓️ सप्ताह 4 (दिन 22–30) – तीव्र परिणाम चरण

समय: 60 मिनट

🔹 वार्म-अप – 5 मिनट
🔹 सूर्य नमस्कार – 10 राउंड (मध्यम गति)
🔹 वीरभद्रासन + उत्कटासन
🔹 नौकासन – 5 बार
🔹 धनुरासन – 3 बार
🔹 कपालभाति – 5 मिनट
🔹 अनुलोम-विलोम – 5 मिनट
🔹 शवासन – 5 मिनट

👉 लक्ष्य: अधिकतम फैट लॉस, शरीर को टोन करना।

📌 अतिरिक्त सुझाव (महत्वपूर्ण)

✔ रात को हल्का भोजन लें
✔ चीनी, तला-भुना कम करें
✔ 7–8 घंटे नींद लें
✔ रोज़ 2–3 लीटर पानी पिएँ
✔ सप्ताह में 1 दिन पूर्ण विश्राम या हल्की वॉक

1 घंटे का मोटापा घटाने वाला योगा टाइमटेबल




 1 घंटे का मोटापा घटाने वाला योग टाइमटेबल — 

पेट की चर्बी, कमर और पूरे शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने के लिए संतुलित क्रम में बनाया गया है:

🕒 कुल समय – 60 मिनट

⏱ 0–5 मिनट : वार्म-अप

  • गर्दन घुमाना (आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ)

  • कंधे रोल करना

  • घुटना और टखना घुमाना

  • हल्की जॉगिंग या जगह पर मार्च

⏱ 5–20 मिनट : सूर्य नमस्कार

  • 6–8 राउंड (धीरे शुरू करें, फिर मध्यम गति)

  • कैलोरी बर्न और पूरे शरीर की सक्रियता

⏱ 20–35 मिनट : खड़े होकर किए जाने वाले आसन

  1. त्रिकोणासन – 1–1 मिनट दोनों ओर

  2. वीरभद्रासन – 1–1 मिनट दोनों ओर

  3. उत्कटासन – 2 बार, 30–40 सेकंड

  4. वृक्षासन – संतुलन हेतु 1–1 मिनट

⏱ 35–50 मिनट : पेट और कमर के लिए

  1. नौकासन – 3 बार, 20–30 सेकंड

  2. भुजंगासन – 3 बार

  3. धनुरासन – 2–3 बार

  4. पवनमुक्तासन – 2 मिनट

⏱ 50–55 मिनट : प्राणायाम

  • कपालभाति – 3 राउंड (प्रत्येक 1 मिनट)

  • अनुलोम-विलोम – 3–4 मिनट

⏱ 55–60 मिनट : रिलैक्सेशन

  • शवासन – 5 मिनट गहरी श्वास के साथ

📌 विशेष निर्देश

  • खाली पेट अभ्यास करें।

  • सप्ताह में कम से कम 5 दिन नियमितता रखें।

  • संतुलित आहार (कम तेल-मिठाई, अधिक सलाद-फल) अपनाएँ।

  • पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ।






मोटापा घटाने की कौन कौन से आसन है ?


 

मोटापा घटाने के लिए वे योगासन सबसे प्रभावी माने जाते हैं जो मेटाबॉलिज़्म बढ़ाएँ, पेट-कमर की चर्बी घटाएँ और पाचन सुधारें। नीचे प्रमुख आसन दिए हैं:

🧘‍♂️ खड़े होकर किए जाने वाले आसन

  1. सूर्य नमस्कार
    – पूरे शरीर की कसरत, कैलोरी बर्न, तेजी से वजन घटाने में सहायक।

  2. त्रिकोणासन
    – कमर और पेट की चर्बी कम करने में सहायक।

  3. वीरभद्रासन
    – जांघ, पेट और बाजू मजबूत करता है।

  4. उत्कटासन
    – थाई, कूल्हे और पेट की चर्बी घटाता है।

🧘‍♀️ पेट की चर्बी घटाने वाले आसन

  1. नौकासन
    – पेट की मांसपेशियाँ मजबूत, बेली फैट कम।

  2. पवनमुक्तासन
    – गैस, कब्ज दूर कर पेट कम करने में मदद।

  3. भुजंगासन
    – पेट और कमर की चर्बी घटाने में सहायक।

  4. धनुरासन
    – पूरे पेट क्षेत्र पर प्रभाव, मोटापा घटाने में लाभकारी।

🔥 तेजी से फैट बर्न करने के लिए

  1. कपालभाति (प्राणायाम)
    – मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है, पेट की चर्बी घटाने में अत्यंत प्रभावी।

  2. चक्रासन
    – पूरे शरीर की चर्बी कम करने में सहायक।

📌 अभ्यास कैसे करें?

  • रोज़ 30–45 मिनट नियमित अभ्यास करें।

  • खाली पेट सुबह करना श्रेष्ठ है।

  • साथ में संतुलित आहार रखें।

  • सप्ताह में 5 दिन अभ्यास करें।







योगासन कितने प्रकार की है ?

 


योगासन मुख्य रूप से कई प्रकार के माने जाते हैं। अलग–अलग ग्रंथों और परंपराओं में इनकी संख्या भिन्न बताई गई है।

📖 शास्त्रीय दृष्टि से

  • हठयोग प्रदीपिका में 15 प्रमुख आसनों का वर्णन है।

1 स्वस्तिकासन, 2. गोमुखासन, 3. वीरासन, 4. कूर्मासन, 5. कुक्कुटासन, 6. उत्तानकूर्मासन, 7. धनुरासन, 8. मत्स्येन्द्रासन, 9. पश्चिमोत्तानासन, 10. मयूरासन, 11. शवासन, 12. सिद्धासन, 13. पद्मासन, 14. सिंहासन, 15. भद्रासन।

  • घेरंड संहिता में 32 आसनों का वर्णन मिलता है।

1 सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. भद्रासन, 4. मुक्तासन, 5. वज्रासन, 6. स्वस्तिकासन, 7. सिंहासन, 8. गोमुखासन, 9. वीरासन, 10. धनुरासन, 11. मृतासन, 12. गुप्तासन, 13. मत्स्यासन, 14. मत्स्येन्द्रासन, 15. गोरक्षासन, 16. पश्चिमोत्तानासन, 17. उत्कटासन, 18. संकटासन, 19. मयूरासन, 20. कुक्कुटासन, 21. कूर्मासन, 22. उत्तानकूर्मासन, 23. मण्डूकासन, 24. उत्तानमण्डूकासन, 25. वृक्षासन, 26. गरुड़ासन, 27. वृषासन, 28. शलभासन, 29. मकरासन, 30. उष्ट्रासन, 31. भुजंगासन, 32. योगासन।

  • महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में आसनों की संख्या नहीं बताई गई, केवल “स्थिर और सुखद” आसन की बात कही गई है।

परंपरा के अनुसार 84  आसन माने जाते हैं, जिनमें से 84 मुख्य और 32 विशेष महत्वपूर्ण बताए गए हैं। परंपरा में 84 आसनों की सूची विभिन्न ग्रंथों व परंपराओं में भिन्न-भिन्न रूप से मिलती है, एक सार्वभौमिक मानक सूची उपलब्ध नहीं है। एक प्रचलित पारंपरिक क्रम इस प्रकार दिया जाता है —


1. सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. स्वस्तिकासन, 4. वज्रासन, 5. वीरासन, 6. भद्रासन, 7. मुक्तासन, 8. गोमुखासन, 9. मत्स्यासन, 10. मत्स्येन्द्रासन, 11. पश्चिमोत्तानासन, 12. मयूरासन, 13. कुक्कुटासन, 14. कूर्मासन, 15. उत्तानकूर्मासन, 16. धनुरासन, 17. शलभासन, 18. भुजंगासन, 19. मकरासन, 20. उष्ट्रासन, 21. वृक्षासन, 22. गरुड़ासन, 23. उत्कटासन, 24. ताड़ासन, 25. पर्वतासन, 26. नौकासन, 27. चक्रासन, 28. सर्वांगासन, 29. हलासन, 30. शीर्षासन, 31. सिंहासन, 32. गोरक्षासन, 33. मण्डूकासन, 34. उत्तानमण्डूकासन, 35. योगमुद्रासन, 36. पवनमुक्तासन, 37. अर्धमत्स्येन्द्रासन, 38. त्रिकोणासन, 39. अर्धचक्रासन, 40. कटिचक्रासन, 41. वृषासन, 42. शशांकासन, 43. बद्धकोणासन, 44. उत्तानपादासन, 45. सुप्तवज्रासन, 46. सुप्तपद्मासन, 47. तितलीासन, 48. अर्धपद्मासन, 49. कन्दासन, 50. पादहस्तासन, 51. उत्थितपादासन, 52. द्विपादशीर्षासन, 53. एकपादशीर्षासन, 54. अकर्णधनुरासन, 55. पार्श्वकोणासन, 56. उत्थितत्रिकोणासन, 57. परिवृत्तत्रिकोणासन, 58. अर्धचन्द्रासन, 59. परिवृत्तपार्श्वकोणासन, 60. प्लवासन, 61. काकासन, 62. बकासन, 63. हंसासन, 64. लोलासन, 65. तोलासन, 66. भेकासन, 67. शीतलीासन, 68. पार्वतीासन, 69. अनन्तासन, 70. शवासन, 71. योगनिद्रासन, 72. विपरीतकरणी, 73. सेतुबंधासन, 74. उर्ध्वमुखश्वानासन, 75. अधोमुखश्वानासन, 76. नटराजासन, 77. उत्तानासन, 78. पार्श्वोत्तानासन, 79. उष्ट्रासन, 80. दण्डासन, 81. अर्धशलभासन, 82. पूर्णशलभासन, 83. भुजपीडासन, 84. योगासन।


🧘‍♂️ अभ्यास की दृष्टि से योगासन के प्रकार

व्यवहारिक रूप में योगासन को इन श्रेणियों में बाँटा जाता है:

  1. बैठकर किए जाने वाले आसन
    1. सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. स्वस्तिकासन, 4. वज्रासन, 5. वीरासन, 6. भद्रासन, 7. मुक्तासन, 8. गोमुखासन, 9. मत्स्येन्द्रासन, 10. पश्चिमोत्तानासन, 11. गोरक्षासन, 12. मण्डूकासन, 13. उत्तानमण्डूकासन, 14. कूर्मासन, 15. उत्तान कूर्मासन, 16. योगमुद्रासन।

  2. खड़े होकर किए जाने वाले आसन
    जैसे – ताड़ासन, त्रिकोणासन

  3. पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन
    जैसे – शवासन, पवनमुक्तासन

  4. पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसन
    जैसे – भुजंगासन, शलभासन

  5. संतुलन वाले आसन
    जैसे – वृक्षासन, गरुड़ासन

  6. उल्टे (इन्वर्जन) आसन
    जैसे – शीर्षासन, सर्वांगासन

यदि संक्षेप में कहें तो –
👉 शास्त्रों में योगासन की संख्या सीमित (15, 32 आदि) बताई गई है,
👉 परंपरा में 84 मुख्य,
👉 और आधुनिक योग में सैकड़ों प्रकार प्रचलित हैं।